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हरी मिर्च की खेती

हरी मिर्च की खेती की पूरी जानकारी

हरी मिर्च की खेती की पूरी जानकारी

दोस्तों आज हम बात करेंगे हरी मिर्च की खेती से जुड़ी सभी प्रकार की आवश्यक जानकारियों के बारे में, हरी मिर्च का नाम सुनते ही जबान में अलग सा तीखापन आ जाता है। हरी मिर्च का इस्तेमाल खाने में स्वाद बढ़ने के साथ खाने को जायकेदार भी बना देता है। हरी मिर्च की खेती की पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी इस पोस्ट के अंत तक जरूर बने रहें:


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हरी मिर्च की खेती:

हरी मिर्च जिसको हम कैप्सिकम एनम के नाम से भी पुकारते हैं, खाने, सब्जी ,चार्ट, मसाले , अचार आदि तरह-तरह की डिशेस बनाने के लिए हरी मिर्च का इस्तेमाल करना अनिवार्य है। आप कितना ही स्वादिष्ट खाना क्यूं न बना लें, परंतु यदि आपने हरी मिर्च का इस्तेमाल नहीं किया होगा तो खाने में कुछ कमी रह जाएगी, जो पूरी नहीं की जा सकती है। ऐसे में हरी मिर्च, मसालों में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हरी मिर्च एक गर्म मसाला कहा जाता है। मिर्च का इस्तेमाल सूखे पाउडर के रूप में, ताज़ी मिर्च तथा विभिन्न विभिन्न तरह से काम में आती है। स्वाद के साथ मिर्च में पौष्टिकता भी पाई जाती है। जैसे मिर्च में विटामिन और सी का प्रमुख स्त्रोत भी होता है। कुछ औषधियों में मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए मिर्च की खेती करने से किसानों को बहुत लाभ पहुंचता है।

हरी मिर्च की खेती करने के लिए उपयुक्त जलवायु का होना:

किसानों के लिए हरी मिर्च की फसल आय के साधन के साथ ही साथ कम लागत वाली भी फसल है। इसलिए हरी मिर्च की खेती करने के लिए किसानों को विभिन्न प्रकार की उपयुक्त जलवायु की आवश्यकता पड़ती है। हरी मिर्च की खेती के लिए सबसे अच्छा तापमान 20 से 35 डिग्री सेल्सियस का तापमान उचित माना जाता है। गर्म आर्द जलवायु फसल के लिए सबसे अच्छी होती है क्योंकि कभी-कभी ऐसा होता है, पाले के द्वारा फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाती है।


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हरी मिर्च की फसल से ज्यादा उत्पत्ति प्राप्त करने के लिए उष्णीय व उप उष्णीय जलवायु की जरूरत होती है। तापमान उचित ना मिलने के कारण मिर्च की कलियाँ, फल, पुष्प आदि को नुकसान पहुंचता है और यह गिरना शुरू हो जाती हैं। ऐसे में हरी मिर्च की खेती करने के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु उपयुक्त होती है। किसानों के अनुसार, आप हरी मिर्च की खेती हर प्रकार की जलवायु में कर सकते हैं। पर उचित रहेगा यदि आप गर्म और आर्द्र जलवायु का चुनाव करते हैं। हरी मिर्ची की फसल पर पाले का बहुत ज्यादा प्रकोप बना रहता है। ऐसे में हरी मिर्च के पौधों को 100 से 120 सेंटीमीटर वर्षा वाले क्षेत्रों में लगाना उचित होगा। ठंडा और गर्म दोनों प्रकार का मौसम हरी मिर्च की फसल के लिए हानिकारक होता है।

हरी मिर्च की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी का चयन :

हरी मिर्च की खेती करने के लिए सबसे उपयोगी मिट्टी बलुई दोमट मिट्टी होती है। किसानों के अनुसार, बलुई दोमट मिट्टी में फसल की बुवाई करने से हरी मिर्ची की पैदावार उच्च कोटि पर होती है। खेतों मे जल निकास की व्यवस्था को जरूर बनाए रखें।

हरी मिर्च की खेती के लिए खेतों को तैयार करें:

मिर्च की खेती करने के लिए किसान भूमि की भली प्रकार से जुताई करते हैं। एक गहरी जुताई की प्राप्ति करने के बाद खेतों को तैयार किया जाता है। जुताई के बाद तकरीबन 10 से 12 टन सड़ी हुई गोबर की खाद को खेतों में डालें। यदि गोबर की खाद सही प्रकार से सड़ी हुई नहीं होगी, तो खेतों में दीमक लग सकते हैं। मिट्टियों को अच्छी तरह से भुरभुरा कर लेना चाहिए। खेतों में क्यारियों को अच्छी तरह से थोड़ी थोड़ी दूरी पर लगाएं।


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हरी मिर्ची की फसल की सिंचाई:

हरी मिर्च की फसल की सिंचाई किसान सर्वप्रथम बीज रोपण करने के बाद देते हैं। मौसम के अनुसार सिंचाई की जाती है। यदि गर्मी का मौसम है तो लगभग 6 से 7 दिनों के अंदर सिंचाई दी जाती है। यदि मौसम ठंडा है यानी सर्दी का है, तो यह सिंचाई लगभग 15 से 20 दिनों के अंदर दी जाती है। जब खेतों में हरी मिर्च के फल व फूल आने लगे तब एक हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। अगर ऐसी स्थिति में आप सिंचाई नहीं करेंगे, तो उत्पादकता और फसलों की बढ़ोतरी में कमी आ जाएगी। साथ ही साथ आपको इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि किसी भी प्रकार से खेतों में पानी का जमाव ना रहे।


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हरी मिर्च की फसल की निराई गुड़ाई करने का तरीका:

हरी मिर्ची की फसल के लिए निराई गुड़ाई करना बहुत ही ज्यादा उपयोगी होता है क्योंकि, निराई गुड़ाई करने से किसी भी प्रकार के कीट, रोग आदि फसलों में नहीं लगने पाते हैं व फसलों का बचाव होता है। निराई गुड़ाई दो से तीन बार हाथों द्वारा, तीन से चार बार गुड़ाई की जरूरत होती है। मिट्टियों को एक से दो बार चढ़ाना उपयोगी होता है।


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दोस्तों हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह आर्टिकल हरी मिर्च की खेती की पूरी जानकारी पसंद आया होगा। हमारे इस आर्टिकल में हरी मिर्ची की खेती से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारियां मौजूद हैं, जिससे आप लाभ उठा सकते हैं। यदि आपको हमारा यहां आर्टिकल पसंद आया हो, तो हमारे इस आर्टिकल को आप ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्तों के साथ और सोशल मीडिया तथा अन्य प्लेटफार्म पर शेयर करें। धन्यवाद।
इस मिर्च का प्रयोग खाने से ज्यादा सुरक्षा उत्पादों में किया जाता है।

इस मिर्च का प्रयोग खाने से ज्यादा सुरक्षा उत्पादों में किया जाता है।

मिर्च को राजा चिली के नाम से भी जाना जाता है। नागालैंड में उत्पादित हो रही यह मिर्च ६०० रुपये प्रति किलो तक के मूल्य पर विक्रय होती है। इसका उपयोग खाने में होने के साथ-साथ कंपनियां इसका प्रयोग कर सुरक्षा उत्पाद भी निर्मित कर रही हैं। भारत में किसी भी फसल को उगाया जा सकता है, क्योंकि यहाँ हर प्रकार की मृदा उपलब्ध है। साथ ही, भारत में विभिन्न प्रकार की जलवायु भी होती हैं एवं प्रत्येक मृदा-जलवायु के माध्यम से भिन्न-भिन्न फसल का उत्पादन मिलता है। हालाँकि, भारत विभिन्न फसलों का एकमात्र सर्वाधिक उत्पादक देश है, परंतु वर्तमान में देखें तो विश्व की सर्वाधिक तीखी मिर्च भूत झोलकिया की जिसे नागा मिर्चा, गोस्ट पेपर, किंग मिर्चा, राजा मिर्चा के नाम से भी जाना जाता है। सर्वाधिक तीखेपन हेतु भूत झोलकिया का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी अंकित किया गया है। देश के उत्तर पूर्वी राज्य नागालैंड में उत्पादित होने वाली इस भूत झोलकिया का विभिन्न देशों में निर्यात हो रहा है। बतादें कि, भारत भूत झोलकिया का सर्वाधिक उत्पादक देश है, परंतु यह मिर्च इतनी तीखी होती है, कि इसको खाने से ज्यादा उपयोग सुरक्षा उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है। नॉर्थ-ईस्ट प्रदेशों में इस मिर्च से भोजन तो निर्मित होते ही हैं, परंतु बेहद कम लोगों को पता होगा कि, भूत झोलकिया मिर्च से सुरक्षा में प्रयोग होने वाली चिली पेपर स्प्रे एवं हैंड ग्रेनेड निर्मित किये जाते हैं। आज कई देशों में पाउडर एवं कच्चे रूप में भूत झोलकिया विक्रय हो रहा है। [embed]https://www.youtube.com/watch?v=66YIwYYDIys&t=32s[/embed]

भूत झोलकिया को क्यों सुरक्षा बलों का कवच माना जाता है

खबरों के मुताबिक बताया गया है, कि भूत झोलकिया मिर्च के तीखेपन की वजह से कुछ लोगों का स्वास्थ्य खराब हो जाता है। इसी कारण से नॉर्थ-ईस्ट के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर इसका उपयोग खाने हेतु नहीं होता परंतु अपनी इसी विशेषता के कारण से इस मिर्च को वर्तमान में भारतीय सुरक्षा बलों का सुरक्षा कवच माना जाता है। उपद्रवियों के विरुद्ध देश सुरक्षा बल फिलहाल इस मिर्च का प्रयोग कर रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ की ग्वालियर, टेकनपुर स्थित टियर स्मोक यूनिट में भूत झोलकिया मिर्च का प्रयोग कर आंसू गैस के गोले निर्मित किये जा रहे हैं। हालाँकि इन गोलों के प्रयोग से कोई शारीरिक हानि नहीं होती, परंतु आंतकवादी व उपद्रवियों की आँखों को धुएं से बंद करने और दम घोटने की दिक्क्त देने में बेहद सहायक होते हैं।


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वर्तमान में भारत की सर्वोच्च रक्षा संस्थान डीआरडीओ यानी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा भूत झोलकिया के अत्यधिक तीखेपन को देखते हुए इसको सुरक्षा उपकरणों में शम्मिलित किया गया है। महिलाओं की आत्मरक्षा हेतु भी भूत झोलकिया से चिली स्प्रे की तरह विभिन्न उत्पाद निर्मित किये जा रहे हैं, हालांकि इस मिर्च स्प्रे के कारण कोई घातक हानि नहीं होती है। परंतु कुछ वक्त तक उपद्रवियों को रोकने एवं गुमराह करने हेतु यह बेहद सहायक साबित होता है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, मिर्ची के तीखेपन में प्रथम स्थान पर प्योर कैप्साइसिन द्वितीय पर स्टैंडर्ड पेपर स्प्रे, तृतीय पर कैरोलिना रीपर एवं चतुर्थ पर ट्रिनिडाड मोरुगा स्कोर्पियन का नाम शामिल है। टॉप 5 तीखी मिर्चों में भूत झोलकिया का नाम भी शम्मिलित है।
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भारत में मिर्च सब्जी और मसाले के रूप में प्रयोग की जाती है। इसका प्रयोग भारतीय उपमहाद्वीप के लगभग हर घर में किया जाता है। यह स्वाद में बेहद तीखी होती है, जिसकी वजह से व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के लिए किचन में इसका इस्तेमाल किया जाता है। भारत में लाल के साथ-साथ हरी मिर्च का भी बहुतायत में उत्पादन किया जाता है। भारत दुनिया में मिर्च का एक प्रमुख निर्यातक देश है। भारत के मिर्च की दुनिया भर के बाजारों में अच्छी खासी मांग रहती है।

मिर्च की खेती में इतना आता है खर्च

अगर किसान भाई एक हेक्टेयर खेत में
मिर्च का उत्पादन करना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए 10 किलोग्राम बीज की जरूरत होगी। देशी मिर्च के 10 किलोग्राम बीज की बाजार में कीमत 2500 रुपये प्रति किलो है। जबकि हाइब्रिड बीज की कीमत 3500 से 4000 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है। इसके अलावा एक हेक्टेयर खेत में सिंचाई, खाद डालना, कीटनाशक डालना और कटाई में 3 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है।

इतना होगा फायदा

एक हेक्टेयर खेत में लगभग 300 क्विंटल मिर्च का उत्पादन हो सकता है। जबकि मिर्च की औसत कीमत 40 रुपये प्रति किलो होती है। इस हिसाब से एक हेक्टेयर खेत में 12 लाख रुपये की मिर्च का उत्पादन हो सकता है। अगर मिर्च की खेती में आने वाली लागत को अलग कर दें तब भी किसान भाइयों को एक हेक्टेयर खेत में मिर्च उत्पादन करने पर लगभग 9 लाख रुपये का मुनाफा हो सकता है। इस हिसाब से किसान भाई बेहद कम समय में मिर्च की खेती से ज्यादा से ज्यादा रुपये कमा सकते हैं।

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ऐसी जमीन पर करें मिर्च की खेती

मिर्च की खेती हर तरह की जमीन में की जा सकती है। अच्छे उत्पादन के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन का चयन करना चाहिए। मिर्च की खेती के लिए जमीन का चुनाव करने के पहले मिट्टी का परीक्षण अवश्य करवाएं। इस खेती के लिए मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए। मिर्च की रोपाई हमेशा मिट्टी के बेड पर ही करना चाहिए। इससे पौधों के आस पास पानी जमा नहीं होता है और पौधे सड़ने से बच जाते हैं। मिर्च के पौधों को हमेशा नर्सरी में तैयार करना चाहिए। जिसके लिए उपचारित बीजों का इस्तेमाल करें। बीजों की बुवाई के 40 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है। जिसे बाद में खेत में लगाया जा सकता है। पौध को खेत में लगाते समय ध्यान रखें कि पौधे स्वास्थ्य हों और उनकी ऊंचाई 15 से 20 सेंटीमीटर होनी चाहिए। मिर्च की खेती में हानिकारक रोगों के साथ ही कीटों का आक्रमण होता रहता है। जिससे निपटने के लिए किसान भाई जैविक कीटनाशकों का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा रोगों से निपटने के लिए मिथाइल डैमेटन, एसीफेट, प्रॉपीकोनाज़ोल या हैक्साकोनाज़ोल जैसी दवाइयों का भी उपयोग किया जा सकता है। फसल आने पर मिर्च को हरे रूप में ही तोड़ लिया जाता है और बाजार में बेंच दिया जाता है। इसके अलावा जब मिर्च लाल हो जाती है तो उसे तोड़कर सुखा लिया जाता है और मिर्च के आकार के हिसाब से अलग कर लिया जाता है। इसके बाद सूखी मिर्च को पैक करके स्टोर कर लिया जाता है और बाजार में बेंचने के लिए भेज दिया जाता है।